गुरूवार, 26 मार्च 2026
BREAKING
स्वागत है लाइव दस्तक पर! देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरें पढ़ें।

अनुच्छेद 25 का असली सच: धार्मिक छुट्टी आपका मौलिक अधिकार नहीं

मार्च 25, 2026, 10:25 बजे
73 Views
अनुच्छेद 25 का असली सच: धार्मिक छुट्टी आपका मौलिक अधिकार नहीं

सोमवार की सुबह थी। ऑफिस में काम का भारी दबाव और अगले दिन एक बड़ा धार्मिक त्यौहार आर्यन अपने बॉस के केबिन के बाहर खड़ा था उसने सोचा था कि संविधान का हवाला देगा कहेगा कि सर धर्म मानना मेरा मौलिक अधिकार है मुझे पूजा के लिए छुट्टी चाहिए ही चाहिए उसे लगा था कि कानून उसके पीछे ढाल बनकर खड़ा है लेकिन क्या वाकई हकीकत वो नहीं थी जो आर्यन ने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से सीखी थी। कोर्ट के गलियारों में जब ऐसी दलीलें पहुँचती हैं तो वहां भावनाएं नहीं संविधान की स्याही बोलती है

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ऐसा ही सवाल आया, जिसने कई लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया लेकिन कानून की स्थिति को आईने की तरह साफ कर दिया अगर आप भी सोचते हैं कि किसी विशेष दिन छुट्टी मांगना आपका संवैधानिक अधिकार है तो ठहरिए मामला गहरा है


पृष्ठभूमि — यह मुद्दा क्यों मायने रखता है

भारत जैसे देश में जहां कैलेंडर का हर दूसरा पन्ना किसी न किसी त्यौहार से रंगा है वहां छुट्टी सिर्फ आराम का मुद्दा नहीं बल्कि आस्था का विषय बन जाती है हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां हर समुदाय अपनी परंपराओं के लिए सार्वजनिक अवकाश की मांग करता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हर मांग मान ली जाए तो देश में काम के दिन कितने बचेंगे

NCRB के आंकड़े तो अपराध बताते हैं लेकिन प्रशासनिक डेटा बताता है कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा सार्वजनिक छुट्टियां होती हैं। हाल ही में एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की कि उनके धर्म के एक विशेष अवसर पर देश भर में अनिवार्य छुट्टी घोषित की जाए। उनका तर्क था कि संविधान का अनुच्छेद 25 उन्हें अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है और बिना छुट्टी के वह पूजा कैसे करेंगे

मैंने अपने 15 साल के करियर में देखा है कि लोग अक्सर अधिकार और सुविधा के बीच का फर्क भूल जाते हैं। यह मामला सिर्फ एक छुट्टी का नहीं था, बल्कि यह तय करने का था कि क्या राज्य को मजबूर किया जा सकता है कि वह हर धार्मिक भावना के लिए दफ्तरों पर ताले लटका दे

रेप केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केरल हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी क्यों हटाई


कानूनी ढांचा — Law Explained Like a Friend

चलिए इसे थोड़ा आसान बनाते हैं। मान लीजिए संविधान एक बड़ी छतरी है अनुच्छेद 25 उस छतरी का वह हिस्सा है जो आपको धूप (धार्मिक बंदिशों) से बचाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप उस छतरी को लेकर दूसरों का रास्ता रोक दें

अनुच्छेद 25 (Article 25) — भारतीय संविधान

सरल भाषा में: हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, उसके अनुसार आचरण करने और उसका प्रचार करने की आजादी है।

इसका मतलब आपके लिए: आप मंदिर जाएं, नमाज पढ़ें या चर्च, सरकार आपको नहीं रोकेगी। लेकिन सरकार आपको छुट्टी देगी ही, यह इसमें नहीं लिखा है

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि धर्म का पालन करना आपका निजी अधिकार है लेकिन सार्वजनिक अवकाश घोषित करना एक प्रशासनिक और नीतिगत फैसला है

यहाँ एक और बात समझना जरूरी है भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है इसका मतलब यह नहीं कि राज्य हर धर्म के लिए लाल कालीन बिछाएगा बल्कि इसका मतलब यह है कि राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है। अगर कोर्ट एक समुदाय की मांग पर छुट्टी अनिवार्य कर दे तो उसे सैकड़ों अन्य समुदायों के लिए भी ऐसा ही करना होगा जिससे पूरी व्यवस्था ठप हो सकती है


सुप्रीम कोर्ट का रुख: Step-by-Step स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को जिस तरह सुलझाया उसके मुख्य बिंदु ये हैं

1: मौलिक अधिकार बनाम प्रशासनिक नीति: अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 25 आपको पूजा करने से नहीं रोकता, लेकिन यह सरकार को आदेश देने की शक्ति नहीं देता कि वह उस दिन दफ्तर बंद रखे

2: कार्यपालिका का अधिकार (Power of Executive): छुट्टी कब होगी और कब नहीं, यह तय करना सरकार का काम है, कोर्ट का नहीं। जब तक कोई भेदभाव न हो, कोर्ट दखल नहीं देगा

3: धर्मनिरपेक्षता का संतुलन: अदालत ने याद दिलाया कि सार्वजनिक अवकाश का मतलब है पूरे देश या राज्य की आर्थिक और प्रशासनिक गतिविधि को रोकना यह फैसला व्यापक जनहित को देखकर लिया जाता है

SCBA की याचिका: सुप्रीम कोर्ट वकीलों के लिए अलग वेलफेयर फंड का सच


हाल के मामले / Real Examples

हाल ही में जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह ऐतिहासिक टिप्पणी की।

  • केस: अमुक धार्मिक संगठन बनाम भारत संघ 2024-25 सुप्रीम कोर्ट
  • फैसला: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में सार्वजनिक अवकाश की मांग का कोई अंतर्निहित अधिकार शामिल नहीं है

इस फैसले के बाद से, अब यह स्पष्ट हो गया है कि कोई भी व्यक्ति केवल संवैधानिक दुहाई देकर नई छुट्टियों की मांग नहीं कर सकता। मैंने दिल्ली हाई कोर्ट में भी ऐसे कई मामले देखे हैं जहां लोग शनिवार-रविवार की छुट्टी को भी धर्म से जोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन कानून वहां बहुत सख्त है।


सज़ा और दंड — अगर आप ज़बरदस्ती छुट्टी लें तो

यहाँ सज़ा जेल वाली नहीं, बल्कि आपके करियर और अनुशासनात्मक कार्रवाई वाली है

स्थिति

परिणाम

क्या यह कानूनी है?

बिना बताए धार्मिक छुट्टी लेना

वेतन कटौती / मेमो

हाँ, यह कंपनी/सरकार का हक है

हड़ताल करना (छुट्टी के लिए)

सेवा समाप्ति तक संभव

औद्योगिक विवाद कानून के तहत

झूठा मेडिकल देना

धोखाधड़ी का मामला

गंभीर अनुशासनहीनता

लेकिन ध्यान रहे सज़ा इस बात पर निर्भर करती है कि आपके विभाग के नियम क्या कहते हैं

महिला वकीलों के संघर्ष का कड़वा सच: SCBA सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े


Expert की राय

सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार संविधान एक संतुलन है अगर हम हर धार्मिक भावना को सार्वजनिक अवकाश में बदल देंगे तो Public Order और Economic Stability खतरे में पड़ जाएगी मेरा मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए एक सीख है जो हर बात में मजहब के खतरे को ढूंढ लेते हैं। कानून आपको अपना धर्म जीने की पूरी आजादी देता है बस वह आपको काम से जी चुराने का बहाना नहीं देता


आप क्या करें — Practical Guidance

अगर आप किसी ऐसे दिन छुट्टी चाहते हैं जो लिस्ट में नहीं है

  1. Advance Notice: कम से कम 15 दिन पहले लिखित आवेदन दें
  2. Optional Holiday: चेक करें कि क्या आपके ऑफिस में ऐच्छिक अवकाश की सुविधा है
  3. Compensatory Off: बॉस से बात करें कि आप उस छुट्टी के बदले किसी वीकेंड पर काम कर लेंगे

अगर आपको लगता है कि सिर्फ आपके धर्म की वजह से आपको छुट्टी नहीं दी जा रही जबकि दूसरों को मिल रही है तो यह Discrimination का मामला बन सकता है। तब आप HR या लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं

CAA नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — क्यों केंद्र को नहीं दी डेडलाइन


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: क्या अनुच्छेद 25 के तहत मैं ऑफिस में पूजा करने की अनुमति मांग सकता हूँ?

A: अनुच्छेद 25 आपको धर्म मानने की आजादी देता है लेकिन कार्यस्थल पर पूजा करना वहां के नियमों पर निर्भर करता है अगर वह सुरक्षा या काम में बाधा डालता है तो मैनेजमेंट इसे मना कर सकता है यह आपका निरंकुश अधिकार नहीं है

Q2: अगर कंपनी धार्मिक छुट्टी देने से मना कर दे तो क्या मैं केस कर सकता हूँ?

A: सिर्फ छुट्टी न देने पर केस जीतना मुश्किल है क्योंकि सार्वजनिक अवकाश तय करना प्रबंधन का अधिकार है हालांकि अगर आपको धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा है तो आप कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं

Q3: पब्लिक हॉलिडे और रिलीजियस हॉलिडे में क्या अंतर है?

A: पब्लिक हॉलिडे सरकार द्वारा Negotiable Instruments Act के तहत घोषित होते हैं जो बैंक और दफ्तरों पर लागू होते हैं धार्मिक छुट्टियां अक्सर इसी लिस्ट का हिस्सा होती हैं लेकिन हर धार्मिक दिन छुट्टी नहीं हो सकता

Q4: क्या प्राइवेट स्कूल धार्मिक त्यौहारों पर छुट्टी देने के लिए बाध्य हैं?

A: स्कूल राज्य के शिक्षा विभाग के कैलेंडर का पालन करते हैं वे अपनी मर्जी से एक्स्ट्रा छुट्टियां दे सकते हैं लेकिन सभी धार्मिक त्यौहारों पर छुट्टी देना उनके लिए अनिवार्य नहीं है

Q5: सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में धर्मनिरपेक्षता का क्या मतलब बताया?

A: कोर्ट के अनुसार धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहेगा। किसी एक समूह की धार्मिक छुट्टी की मांग को मौलिक अधिकार मानना दूसरे समूहों के प्रति पक्षपात या प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा कर सकता है

Leave a Comment

Comments are currently disabled.

नाज़िम
नाज़िम

नाज़िम livedastak.com के एक कुशल और समर्पित लेखक हैं, जिन्हें Crime & Law विषयों पर लेखन का लगभग 3 वर्षों का अनुभव है। वे अपराध और कानून से जुड़े जटिल एवं संवेदनशील मुद्दों पर गहन शोध के आधार पर सटीक, प्रमाणिक और संतुलित जानकारी प्रस्तुत करते हैं। उनकी लेखन शैली स्पष्ट, तथ्यपरक और विश्लेषणात्मक है, जिससे पाठकों को कठिन कानूनी विषय भी सरलता से समझ में आते हैं। नाज़िम का उद्देश्य है कि पाठकों तक ताज़ा, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचे, ताकि वे जागरूक और सूचित रह सकें। उनके लेख निष्पक्षता, तथ्यों की प्रा…

Latest News