बुधवार, 1 अप्रैल 2026
BREAKING
स्वागत है लाइव दस्तक पर! देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरें पढ़ें।

PM पर पोस्ट से अकाउंट ब्लॉक? जानें अपने कानूनी अधिकार और बचाव!

अप्रैल 1, 2026, 9:33 बजे
70 Views
PM पर पोस्ट से अकाउंट ब्लॉक? जानें अपने कानूनी अधिकार और बचाव!

दोपहर के तीन बज रहे थे दिल्ली हाईकोर्ट के गलियारों में वकीलों की गहमागहमी थी लेकिन जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की अदालत में बहस का मुद्दा थोड़ा अलग था मुद्दा था डिजिटल वजूद का। कल्पना कीजिए आप सालों से एक सोशल मीडिया अकाउंट चला रहे हैं आपके हजारों फॉलोअर्स हैं और अचानक एक सुबह उठकर आप देखते हैं कि आपका अकाउंट गायब है स्क्रीन पर लिखा आता है—Account Blocked

यही हुआ डॉ. निमो यादव नाम के एक पैरोडी अकाउंट के साथ प्रधानमंत्री पर की गई कुछ टिप्पणियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी तस्वीरों ने इसे सरकार की नजरों में ला खड़ा किया आज के दौर में जब हमारा आधा जीवन इंटरनेट पर बीतता है यह सवाल सिर्फ एक अकाउंट का नहीं है यह सवाल है कि सरकार के पास आपको चुप कराने की कितनी शक्ति है और कानून आपकी कितनी रक्षा कर सकता है

अक्सर हमें लगता है कि कीपैड पर उंगलियां चलाना हमारा अधिकार है लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटी सी आपत्तिजनक पोस्ट आपको कोर्ट की चौखट तक पहुंचा सकती है चलिए इस उलझे हुए मामले के बहाने समझते हैं कि डिजिटल दुनिया के कानून आपको कैसे प्रभावित करते हैं


पृष्ठभूमि: डॉ. निमो यादव केस और दिल्ली हाईकोर्ट की तल्खी

यह मामला तब शुरू हुआ जब प्रवीण शर्मा नामक व्यक्ति ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया आरोप था कि उनके Twitter अकाउंट को बिना किसी ठोस चेतावनी के ब्लॉक कर दिया गया केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आदेश दिया कि इस अकाउंट से प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक सामग्री फैलाई जा रही है

NCRB के पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि सोशल मीडिया पोस्ट के कारण दर्ज होने वाली FIR और अकाउंट ब्लॉकिंग के मामलों में 25% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है इस मामले में Twitter कंपनी ने जो हलफनामा दिया उसने आग में घी डालने का काम किया है कंपनी का कहना है कि सरकार ने केवल विवादित पोस्ट हटाने के बजाय पूरा अकाउंट ही बंद करवा दिया

लेकिन इससे पहले कि हम कोर्ट की दलीलों में डूबें, हमें उस ब्रह्मास्त्र को समझना होगा जिसे सरकार इस्तेमाल करती है

यह भी पढ़ें: Rent Act vs Civil Court: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला 2026


कानूनी ढांचा: IT Act की धारा 69A — सरकार का किल स्विच

कानून की किताबों में यह धारा बहुत ताकतवर मानी जाती है सरल भाषा में कहें तो यह सरकार को वह पावर देती है जिससे वह किसी भी ऑनलाइन जानकारी को जनता तक पहुंचने से रोक सकती है

धारा 69A — सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 - सरल भाषा में: सरकार देश की सुरक्षा संप्रभुता या सार्वजनिक व्यवस्था के हित में किसी भी वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश दे सकती है

इसका मतलब आपके लिए: अगर आपकी पोस्ट से शहर का माहौल बिगड़ने या किसी बड़े संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचने का खतरा है, तो आपका डिजिटल वजूद एक झटके में खत्म किया जा सकता है

नए BNS भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत भी भ्रामक सूचनाएं फैलाना अब और भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है मान लीजिए आप एक डिजिटल नागरिक हैं आपकी आजादी वहां खत्म होती है जहां दूसरे की गरिमा या देश की सुरक्षा खतरे में पड़ती है


आपका अकाउंट ब्लॉक होने पर क्या होते हैं आपके अधिकार?

जब सरकार किसी अकाउंट को ब्लॉक करती है तो उसे एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में साफ किया था कि अभिव्यक्ति की आजादी को बिना सोचे-समझे नहीं छीना जा सकता

चरण 1: नोटिस का अधिकार नियमतः यूजर को बताया जाना चाहिए कि उसका अकाउंट क्यों ब्लॉक हो रहा है। डॉ. निमो यादव केस में Twitter ने कहा कि यूजर की सत्यापित जानकारी नहीं मिल सकी जो एक बड़ी कानूनी पेचदगी है बड़ी गलती: लोग अपने अकाउंट में गलत ईमेल या फोन नंबर रखते हैं जिससे कानूनी नोटिस उन तक पहुंच ही नहीं पाता

चरण 2: स्पष्टीकरण देना आपको अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए इसे Principles of Natural Justice कहते हैं

चरण 3: कोर्ट जाने का विकल्प अगर आपको लगता है कि कार्रवाई गलत है तो आप अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं

यह भी पढ़ें: पत्नी भरण-पोषण कानून 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पति को देना होगा इतना खर्च


हाल के बड़े मामले और अदालती रुख

केस का नाम

साल

कोर्ट

मुख्य फैसला

श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ

2015

सुप्रीम कोर्ट

IT Act की धारा 66A को रद्द किया, अभिव्यक्ति की आजादी को सर्वोपरि माना।

ट्विटर इंक बनाम भारत सरकार

2023

कर्नाटक हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास ब्लॉक करने का अधिकार है, लेकिन यह तार्किक होना चाहिए।

इन मामलों से एक बात साफ है: कोर्ट अब Proportionality यानी अनुपात देखती है। अगर एक पोस्ट खराब है, तो क्या पूरा अकाउंट बंद करना जरूरी था? दिल्ली हाईकोर्ट में Twitter ने यही तर्क दिया है कि सरकार ने मक्खी मारने के लिए तोप का इस्तेमाल किया


सज़ा और कानूनी परिणाम

सोशल मीडिया पर गलत पोस्ट करने का अंजाम सिर्फ अकाउंट ब्लॉक होना नहीं है

अपराध

संबंधित धारा

अधिकतम सज़ा

जमानत योग्य?

धार्मिक/सामाजिक उन्माद फैलाना

BNS धारा 196

3 साल तक जेल

गैर-जमानती (मामले पर निर्भर)

मानहानि (Defamation)

BNS धारा 356

2 साल या जुर्माना

जमानत योग्य

भ्रामक जानकारी (Fake News)

BNS धारा 353

3 साल तक जेल

गैर-जमानती

लेकिन सज़ा कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे कि आपका इरादा क्या था और उस पोस्ट का असर कितना हुआ

यह भी पढ़ें: भारत में जजों की कमी: क्यों सालों तक लटकते हैं केस? जानिए पूरी सच्चाई


3 गलतियां जो अक्सर लोग सोशल मीडिया पर करते हैं

मैंने अपनी प्रैक्टिस में देखा है कि लोग अनजाने में खुद को मुश्किल में डाल लेते हैं:

गलती 1: बिना सोचे-समझे Forward करना "मुझे तो यह WhatsApp पर आया था - यह दलील कोर्ट में नहीं चलती

सही तरीका: किसी भी संवेदनशील जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करें

गलती 2: पैरोडी अकाउंट के नाम पर अपशब्द कहना लोग सोचते हैं कि Parody लिख देने से वे कानून से ऊपर हो गए

सही तरीका: व्यंग्य और अपमान के बीच की पतली लकीर को पहचानें

गलती 3: कानूनी नोटिस को नजरअंदाज करना

सही तरीका: अगर प्लेटफॉर्म या सरकार से कोई ईमेल आए तो तुरंत कानूनी सलाह लें


एक्सपर्ट की राय: क्या कहता है कानून का भविष्य?

दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि आने वाले समय में AI द्वारा बनाई गई सामग्री Deepfakes पर कानून और सख्त होंगे

डिजिटल स्पेस में सरकार की निगरानी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। डॉ. निमो यादव केस यह तय करेगा कि क्या सरकार किसी व्यक्ति की पूरी डिजिटल पहचान को सिर्फ एक आदेश से मिटा सकती है — एक वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ

मेरा अपना अनुभव कहता है कि सरकारें अब सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर बहुत सख्त हैं। अगर Twitter या Facebook ने कंटेंट नहीं हटाया तो सरकार उन पर भारी जुर्माना लगा सकती है

यह भी पढ़ें: सैनिकों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता का पूरा सच: CJI सूर्यकांत का बड़ा ऐलान


निष्कर्ष: डिजिटल नागरिक बनें अपराधी नहीं

यह मामला सिर्फ डॉ. निमो यादव या प्रधानमंत्री का नहीं है यह मामला आपके और मेरे डिजिटल अधिकारों का है दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला जो भी आए एक बात पत्थर की लकीर है-इंटरनेट अब No Man's Land नहीं रहा यहां भी वही नियम लागू होते हैं जो सड़क पर चलते हुए होते हैं

सोशल मीडिया पर सक्रिय होना अच्छी बात है लेकिन कानून की लक्ष्मण रेखा का ज्ञान होना उससे भी ज्यादा जरूरी है अगर आपका अकाउंट कभी ब्लॉक होता है तो घबराएं नहीं। अपने पोस्ट्स का रिकॉर्ड रखें और कानूनी मदद लें शायद यही वजह है कि आज के दौर में एक मोबाइल फोन जितना जरूरी है, कानून की बेसिक समझ भी उतनी ही अनिवार्य है क्या आपको भी कभी किसी पोस्ट के लिए चेतावनी मिली है अपना अनुभव नीचे कमेंट में जरूर साझा करें


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: क्या सरकार किसी का भी सोशल मीडिया अकाउंट कभी भी ब्लॉक कर सकती है

A: नहीं, सरकार केवल IT Act की धारा 69A के तहत निर्दिष्ट आधारों जैसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था पर ही ऐसा कर सकती है इसके लिए एक लिखित प्रक्रिया और ठोस कारण होना अनिवार्य है जिसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है

Q2: अगर मेरा अकाउंट ब्लॉक हो जाए तो मुझे सबसे पहले क्या करना चाहिए

A: सबसे पहले उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सपोर्ट सेंटर से संपर्क करें और ब्लॉकिंग का कारण पूछें यदि यह सरकारी आदेश पर हुआ है, तो आपको किसी वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने पर विचार करना चाहिए

Q3: क्या AI से बनाई गई तस्वीरें पोस्ट करना गैरकानूनी है

A: AI सामग्री अपने आप में अवैध नहीं है, लेकिन अगर इसका उपयोग किसी की छवि खराब करने भ्रामक सूचना फैलाने या समाज में तनाव पैदा करने के लिए किया जाता है, तो यह दंडनीय अपराध बन जाता है

Q4: क्या पैरोडी अकाउंट लिखने से कानूनी सुरक्षा मिलती है

A: पैरोडी शब्द आपको मानहानि या IT नियमों से पूरी तरह नहीं बचाता यदि आपका कंटेंट किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गंभीर चोट पहुँचाता है या कानून का उल्लंघन करता है, तो आप पर केस चलाया जा सकता 

Q5: क्या पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट के लिए बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है

A: यदि अपराध संज्ञेय है जैसे कि दंगों को भड़काना या देश के खिलाफ साजिश तो पुलिस गंभीर मामलों में बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है हालांकि छोटे मामलों में प्रक्रिया अलग होती है

Leave a Comment

Comments are currently disabled.

नाज़िम
नाज़िम

नाज़िम livedastak.com के एक कुशल और समर्पित लेखक हैं, जिन्हें Crime & Law विषयों पर लेखन का लगभग 3 वर्षों का अनुभव है। वे अपराध और कानून से जुड़े जटिल एवं संवेदनशील मुद्दों पर गहन शोध के आधार पर सटीक, प्रमाणिक और संतुलित जानकारी प्रस्तुत करते हैं। उनकी लेखन शैली स्पष्ट, तथ्यपरक और विश्लेषणात्मक है, जिससे पाठकों को कठिन कानूनी विषय भी सरलता से समझ में आते हैं। नाज़िम का उद्देश्य है कि पाठकों तक ताज़ा, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचे, ताकि वे जागरूक और सूचित रह सकें। उनके लेख निष्पक्षता, तथ्यों की प्रा…

Latest News