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CJI यू यू ललित का कार्यकाल महज 74 दिन

नई दिल्ली : देश के नए चीफ जस्टिस यू यू ललित पदभार संभालते ही एक्शन में है। वह सप्ताह में तीन सुनवाई का रोस्टर बना चुके हैं। हर केस पर सुनवाई के ढाई घंटे तक कर दिए गए हैं। दरअसल, जस्टिस ललित के पास बतौर CJI महज 74 दिन का कार्यकाल है। ऐसे में वह कम समय में ज्यादा से ज्यादा मामले की सुनवाई की योजना बना चुके हैं।

चीफ जस्टिस का कार्यभार संभालने के बाद से ही जस्टिस ललित संविधान पीठ में मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक तरीके से कर रहे हैं। चीफ जस्टिस ललित की अगुआई वाली संविधान पीठ में चार मामले की सुनवाई हो रही है। जस्टिस ललित ने कहा कि, ‘मेरे पास समय की बेहद कमी है। इन मामलों पर सुनवाई के लिए वक्त कम है।’ जस्टिस ललित का कार्यकाल 8 नवंबर को खत्म हो रहा है। यही नहीं, चीफ जस्टिस ललित ने पांच जजों की बेंच अन्य मामलों की सुनवाई के लिए गठित किया है।

चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच सभी चार मामलों की सुनवाई अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरी कर लेगा और फिर फैसला सुनाएगा। चीफ जस्टिस वाली बेंच संविधान पीठ के चार मामलों की सुनवाई करेगा।

– सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में EWS आरक्षण की सीमा 10 प्रतिशत के संवैधानिक वैधता पर सुनवाई।
-क्या धर्म के आधार पर आरक्षण हो सकता है।
-हाईकोर्ट से अपील की सुनवाई के लिए कोर्ट्स ऑफ अपील के गठन पर सुनवाई।
-क्या पंजाब में सिख संस्थानों को डीम्स अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किया जा सकता है?
चीफ जस्टिस वाली बेंच में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस रविंद्र भट्ट, ज्टिस जे बी पारदीवाला, जस्टिस बी त्रिवेदी शामिल हैं। कोर्ट आर्थिक आरक्षण सीमा पर सबसे पहले सुनवाई को राजी हो गई है। इसके बाद बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी कि क्या धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है। बेंच ने कहा कि वह कोशिश करेगी कि एक केस की सुनवाई एक सप्ताह (करीब 7.5 घंटे) के अंदर पूरी कर ले। बेंच ने कहा कि उनके पास वक्त की बेहद कमी है। बेंच ने वकीलों को कहा है कि वे अपनी जिरह संक्षिप्त रखें और समयसीमा के भीतर पूरी कर लें। संविधान पीठ में अब मामले की सुनवाई पहले की तरह नहीं होगी। समयसीमा के अंदर सुनवाई पूरी की जाएगी।