आजादी के 75वें वर्ष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का उपहार देश को देने के इरादे से खेलें : पीएम

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रमण्डल खेलों में भाग लेने के लिए बर्मिंघम गये भारतीय खिलाड़ियों से कहा है कि वह अपनी ओर से जीत के पूरे प्रयास करें पर किसी भी प्रकार का तनाव न लें। प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खिलाड़ियों से बात कर उनका हौंसला बढ़ाते हुए यह बात कही। भारत ने इस टूर्नामेंट के लिए अपना 215 खिलाड़ियों का दल भेजा है। भारतीय दल में ओलंपिक स्वर्ण विजेता भाल फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के अलावा बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु, पहलवान बजरंग पूनिया, और भारोत्तोलक मीराबाई चानू जैसे ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ी शामिल हैं।

मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत यह कहते हुए किया कि जी भरकर खेलिएगा, जमकर खेलिएगा, पूरी ताकत से खेलें पर किसी प्रकार का तनाव नहीं रखें। पीएमओ की ओर से जारी बयान के अनुसार, वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री से हुई इस बातचीत के दौरान खिलाड़ियों के साथ साथ उनके कोच भी शामिल थे। मोदी ने भारतीय दल से कहा कि आजादी के 75वें वर्ष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का उपहार देश को देने के इरादे से खेलें। प्रधानमंत्री ने स्टीपलचेज खिलाड़ी अविनाश साबले के अलावा भारोत्तोलक अचिंत शिउले, बैडमिंटन खिलाड़ी त्रिसा जॉली, हॉकी खिलाड़ी सलीमा टेटे, पैरा एथलीट शर्मिला और साइकिलिस्ट डेविड बैकहम से भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का ये समय भारतीय खेलों के इतिहास के लिए सबसे अहम है। आज आप जैसे खिलाड़ियों का हौसला भी बुलंद है, ट्रेनिंग भी बेहतर हो रही है और खेल के प्रति देश में माहौल भी जबरदस्त है।

मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत यह कहते हुए की कि जी भरकर खेलिएगा, जमकर खेलिएगा, पूरी ताकत से खेलिग और बिना तनाव के खेलिएगा। पीएम ने पहले स्टीपल चेज में हिस्सा ले रहे साबले से बातचीत की। इसके बाद पीएम ने कहा कि कोई नहीं है टक्कर में कहां पड़े हो चक्कर में।’ मोदी ने सबसे पहले साबले से पूछा कि आप सियाचीन में भी नौकरी कर चुके हैं। महाराष्ट्र से आकर हिमालय में ड्यूटी करने का अनुभव कैसा रहा? इस पर इस एथलीट ने जवाब दिया, मैं 2012 में सेना में भर्ती हुआ था। चार साल सामान्य सैनिक की तरह नौकरी की. लेकिन, इसके बाद सेना ने मुझे एथलेटिक्स में उतरने का मौका दिया। मेरे लिए सियाचीन की बर्फीली चोटियों पर काम करना शानदार अनुभव रहा। सेना में भर्ती के दौरान 9 महीने की सख्त ट्रेनिंग से गुजरना होता है. उससे एक इंसान के तौर पर भी बेहतर होने में मदद मिलती है। मुझे लगता है कि उस ट्रेनिंग के बाद मैं जीवन में किसी भी फील्ड में उतरूंगा तो बेहतर ही करूंगा। इसका मुझे काफी फायदा हुआ।

मोदी ने उनसे सिय़ाचीन और स्टीपल चेज बीच संबंध को लेकर भी सवाल पूछा। इस पर एथलीट ने कहा, दोनों जगह बाधाओं का सामना करना पड़ता है। जहां सियाचीन में खराब मौसम और बर्फीली चोटियां हैं। वहीं, स्टीपलचेज में भी आपको कई तरह की बाधाओं के बीच छलांग लगानी होती है। कभी पानी तो कभी आपको दूसरी बाधाओं को पार करना पड़ता है। एथलीट बनने से पहले साबले का वजन 74 किलो तक था पर उन्होंने तीन-चार महीनों के भीतर ही अपना 20 किलो वजन कम किया था। प्रधानमंत्री ने यह जानकारी साझा करते हुए उनके वजन कम करने का राज पूछा, तो एथलीट ने कहा कि सामान्य सैनिक के तौर पर जब वो ड्यूटी कर रहे थे, तो उनका वजन काफी ज्यादा था। वो पहले 74 किलो के थे। ऐसे में जब उन्होंने स्टीपलचेज में उतरने का फैसला किया तो वजन ही सबसे बड़ी परेशानी था। उन्होंने एथलेटिक्स के जरिए ही तीन से चार महीने में ही अपना 20 किलो से अधिक वजन कम कर लिय़ा. वो अभी 53 किलो के हैं।

राष्ट्रमण्डल खेलों का आयोजन 28 जुलाई से 8 अगस्त के बीच होगा। इसमें भारतीय एथलीट 19 खेलों की 141 स्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री ने गत वर्ष टोक्यो ओलंपिक खेलों से पहले भी खिलाड़ियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की थी।