मंकीपॉक्स: केरल के पांच जिलों में विशेष अलर्ट जारी, दुर्लभ वायरस से हो सकता है अंधापन

नई दिल्ली. केरल (Kerala) में गुरुवार को मंकीपॉक्स (Monkeypox) का पहला केस सामने आने के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने राज्य में मंकीपॉक्स के प्रसार को रोकने के लिए शुक्रवार को विशेष अलर्ट जारी किया है। माना जा रहा है कि पिछले 50 से 60 वर्षों में यह मंकीपॉक्स का सबसे बड़ा आउटब्रेक है। इसके मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति से निपटने में अधिकारियों का सहयोग करने के लिए राज्य में एक उच्च स्तरीय बहु-विषयक टीम भेजी है। बता दें कि मंकीपॉक्स संक्रमण का देश में यह पहला मामला है।

पांच जिलों में विशेष अलर्ट जारी
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि पांच जिलों- तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथनमथिट्टा, अलप्पुझा और कोट्टायम में विशेष अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि इन जिलों के लोगों ने संक्रमित व्यक्ति के साथ शारजाह-तिरुवनंतपुरम इंडिगो उड़ान में यात्रा की थी जो यहां 12 जुलाई को पहुंची थी।

आंखों के अंदर निकलते हैं दाने
AIIMS के मेडिसन एक्सपर्ट डॉक्टर पीयूष रंजन के मुताबिक, मंकीपॉक्स के लक्षण स्मॉलपॉक्स और चेचक जैसे हैं। इस बीमारी में शुरुआत में रोगी को तेज बुखार आ सकता है और लिम्फ नोड्स (गांठ) बढ़ सकती है। 1-5 दिनों के बाद चेहरे और हाथों पर पानी वाले दाने निकल सकते हैं। चिंता की बात यह है कि मंकीपॉक्स में दाने आंखों में और मुंह के अंदर भी निकल सकते हैं जिससे अंधापन हो सकता है।

पीयूष रंजन ने कहा, मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। उन्होंने कहा, चिंता का कोई कारण नहीं है क्योंकि मंकीपॉक्स वायरस की संक्रामकता बहुत कम है, हालांकि यह कोविड वायरस की तुलना में बच्चों के लिए घातक हो सकता है।

क्या है मंकीपॉक्स?
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के मुताबिक, इंसानों में पहली बार मंकीपॉक्स वायरस की पुष्टि 1970 में अफ्रीकी देश कांगो में हुई थी। यह वायरस अब अफ्रीका के 11 देशों में मौजूद हैं। इसके शुरुआत मामले 1958 में सामने आए थे। जब रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में ये बीमारी फैली।