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अखिलेश के हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का मजाक उड़ाने से साधु शब्दों में नाराजगी

अखाड़ा परिषद ने कहा कुंभ में नहीं बुलाएंगे सपा सुप्रीमो को

-संजय सक्सेना, लखनऊ

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जिस तरह से तुष्टिकरण की सियासत के चलते हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं, उससे तमाम हिंदू संगठन और साधु संत समाज की नाराजगी अखिलेश यादव से बढ़ती जा रही है. एक तरफ उनसे पार्टी के दिग्गज नेता नाराज हैं और उनके गठबंधन सहयोगी आंखें दिखा रहे हैं, वह अखिलेश के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है. कल की ही बात है जब अखिलेश के विधायकों ने विधानसभा के अंदर हंगामा काटा तो शिव पाल यादव और आजम खान के विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम अपनी सीट पर बैठे चुपचाप राज्यपाल का भाषण सुनते रहे. वही सुहेलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर तो लगातार अखिलेश को नसीहत दे रहे हैं. उनसे ऐसी के कमरे से बाहर निकलकर जनता की भी जाने को कहते हैं तो विधानसभा में सपा विधायकों के हंगामे को उनकी पार्टी ने समर्थन नहीं दिया. उधर अखिलेश का बड़बोला पर भी उन पर भारी पड़ रहा है. हिंदू देवी-देवताओं के प्रति विवादित बयान देने के कारण साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अखिलेश यादव के बयान पर नाराजगी जताई है. उन्होंने अखिलेश यादव से माफी की मांग की है. संतों ने कहा, “अगर अखिलेश यादव माफी नहीं मांगते है तो प्रयागराज के 2025 के कुंभ में उन्हें न्योता नहीं दिया जाएगा.”

अखाड़ा परिषद के संतों ने कहा, “अगर इसके बाद भी अखिलेश कुंभ मेले में आएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा. सार्वजनिक कार्यक्रमों में अखिलेश यादव का बहिष्कार किया जाएगा.” इस मामले में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी का बयान आया है. उन्होंने कहा है कि ज्ञानवापी मामले में नेताओं की बयानबाजी पर नजर रखने के लिए जल्द ही पांच सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी. इस कमेटी में उन महात्माओं को जगह दी जाएगी जो कानून की डिग्री लिए हुए हैं और उन्हें कानून की जानकारी है. महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा परिषद जरूरत पड़ने पर सनातन धर्मियों को कानूनी मदद भी मुहैया कराएगी. नेता धार्मिक मुद्दों पर हमारा समर्थन ना करें तब भी कोई बात नहीं लेकिन विरोध कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. खुदा राजनीति के जानकार कहते हैं कि अखिलेश की परिपक्वता ना जाने कहां गायब होती जा रही है. जब से वह सत्ता से बाहर आए हैं तब से उनकी सोच काफी निगेटिव हो गई है.

गौरतलब हो हाल ही में अखिलेश यादव ने बयान दिया था कि कहीं भी मूर्ति रख कर पूजा शुरु कर दी जाती है. अखिलेश यादव के इसी बयान पर अखाड़ा परिषद ने नाराजगी जताई है. अखाड़ा परिषद ही कुंभ मेलों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत प्रमुख हस्तियों को शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण भेजती है. 2019 के प्रयागराज कुंभ मेले में तत्कालीन अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने खुद अखिलेश यादव को स्नान कराया था. लेकिन इसके बाद से माहौल काफी बदल चुका है.

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