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वायु प्रदूषण से बढ़ जाती है दिल की धड़कन, स्पेन यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी का दावा

लंदन: स्पेन के मैड्रिड में यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी की सांइस कांग्रेस में पेश एक शोध के अनुसार पीएम (2.5) कणों का प्रदूषण पूरे सप्ताह औसत से एक ग्राम/घनमीटर अधिक रहने पर वेंट्रिकुलर एरिथीमिया (असामान्य दिल की धड़कन) की समस्या 2.4 प्रतिशत, वहीं पूरे सप्ताह पीएम (10) कणों का प्रदूषण एक ग्राम/घन मीटर अधिक होने पर वेंट्रिकुलर एरिथीमिय का खतरा 2.1 फीसदी बढ़ जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण सिर्फ जलवायु परिवर्तन के लिए चिंता का विषय नहीं है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। वैज्ञानिकों के एक शोध के अनुसार अधिक वायु प्रदूषण में रहने से जानलेवा दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

स्पेन के मैड्रिड में यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी की सांइस कांग्रेस में पेश एक शोध के अनुसार पीएम (2.5) कणों का प्रदूषण पूरे सप्ताह औसत से एक ग्राम/घनमीटर अधिक रहने पर वेंट्रिकुलर एरिथीमिया (असामान्य दिल की धड़कन) की समस्या 2.4 प्रतिशत, वहीं पूरे सप्ताह पीएम (10) कणों का प्रदूषण एक ग्राम/घन मीटर अधिक होने पर वेंट्रिकुलर एरिथीमिय का खतरा 2.1 फीसदी बढ़ जाता है।

शोध के दौरान वायु प्रदूषण और वेंट्रिकुलर एरिथीमिया के बीच संबंध को जांचा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि जिन लोगों में वेंट्रिकुलर एरिथीमिया (असमान्य दिल की धड़कन) की समस्या ज्यादा है उन्हें वायु प्रदूषण की जांच नियमित करते रहनी चाहिए।

शोधकर्ता एलेसिया जेनी के अनुसार, वायु के प्रदूषित कण हृदय की मांसपेशियों में सूजन का कारण बनते हैं, जिससे कार्डियक एरिथीमिया (असामान्य दिल की धड़कन की बीमारी) की समस्या बढ़ जाती है। जब वातावरण में वायु प्रदूषण वाले कण पीएम (2.5) व पीएम (10) क्रमश: 35 माइक्रोग्राम/घनमीटर व 50 ग्राम/घनमीटर से अधिक हों तो जितना संभव हो घर के अंदर रहना चाहिए और बाहर जाने पर एन-95 मास्क पहनना चाहिए।

घर में हवा को साफ करने का प्रबंध करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायु प्रदूषण से हर साल करीब 42 लाख लोगों की असमय मौत हो जाती है। दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में हर पांच में से एक की मौत प्रदूषित वायु के कारण होती है। रिपोर्ट में साफ है कि दिल की बीमारियों के पीड़ित मरीजों की जिंदगी दवाइयों और इस क्षेत्र में हो रहे शोध पर निर्भर होने के साथ ही इस भी निर्भर करती है कि उनमें सांस से कैसी हवा अंदर जा रही है।

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