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यह खास ब्लड ग्रुप दुनिया में सिर्फ 43 लोगों में पाया जाता है, क्या आपका भी यही ग्रुप है? जानिए इसकी खासियत

क्या आप जानते हैं कि एक और ब्लड ग्रुप है जो पूरी दुनिया में बहुत कम लोगों में पाया जाता है और इसकी मांग भी उतनी ही ज्यादा होती है। दरअसल हम जिस ब्लड ग्रुप की बात कर रहे हैं उसे दुनिया का सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप माना जाता है और इस ग्रुप को गोल्डन ब्लड ग्रुप और आरएच नल के नाम से जाना जाता है।

गोल्डन ग्रुप को सुनने से ही कुछ खास होने का अहसास होता है। यह ग्रुप दुनिया में बहुत कम लोगों का है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सबसे दुर्लभ होने के कारण शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने इसे गोल्डन ब्लड नाम दिया है. यह रक्त मूल्यवान है क्योंकि यह दुर्लभ है और इसे किसी भी रक्त समूह में स्थानांतरित किया जा सकता है। तो आइए एक बार इस ब्लड ग्रुप के बारे में विस्तार से जानते हैं..

गोल्डन ब्लड ग्रुप की विशेषता क्या है?
यूएस रेयर डिजीज इंफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, गोल्डन ब्लड ग्रुप/आरएच नल एंटीजन से मुक्त होता है। इसलिए जिन लोगों के शरीर में यह खून होता है उन्हें एनीमिया की शिकायत हो सकती है। यही कारण है कि जैसे ही ऐसे लोगों को सूचित किया जाता है, डॉक्टर उन्हें आहार पर विशेष ध्यान देने और आयरन युक्त चीजों का अधिक से अधिक सेवन करने की सलाह देते हैं। ऐसे में इस खून को ‘गोल्डन ब्लड’ कहा जाता है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई एंटीजन नहीं पाया जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि यदि यह रक्त किसी ब्लड ग्रुप को चढ़ाया जाए तो शरीर उसे स्वीकार कर लेता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि एक शोध के अनुसार यह अब तक केवल 43 लोगों में ही पाया गया है. इनमें ब्राजील, कोलंबिया, जापान, आयरलैंड और अमेरिका के लोग शामिल हैं। दुर्लभ होने और केवल एक ही रक्त समूह को स्वीकार करने में सक्षम होने के कारण, डॉक्टर इन लोगों को लगातार रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर यह रक्त उनके काम आ सके।

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