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ग्रीस का झंडा रहता है ऊंचा!

(अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस 23 जून पर विशेष)

-योगेश कुमार गोयल

ओलंपिक खेलों में ग्रीस का झंडा ऊंचा रहता है। ऐसी मान्यता है कि ओलंपिक खेलों की शुरुआत करीब 2796 वर्ष पूर्व ग्रीस में जीयस के पुत्र हेराकल्स ने की थी। प्राचीन ओलंपिक खेलों का आयोजन 776 ईसा पूर्व से सन 393 तक हर चार वर्ष के अंतराल पर होता रहा। जब इन खेलों में खेल भावना सर्वोपरि होने के बजाय धोखाधड़ी, ईर्ष्या और घटिया शर्तों ने घर कर लिया तो रोमन सम्राट थ्योडॉसियस ने ओलंपिक खेलों पर प्रतिबंध लगा दिया। इस प्रकार ओलंपिक खेलों का लंबा अध्याय समाप्त हो गया। प्राचीन काल में ओलंपिक खेलों का कितना महत्व था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ईसा पूर्व पांचवीं शताब्दी में ग्रीस के महान गीतकार पिन्डार ने लिखा था कि जिस प्रकार दिन के समय आकाश में सूर्य के समान गर्म और चमकदार कोई सितारा नहीं होता, उसी प्रकार ओलंपिक खेलों से बड़ी कोई प्रतियोगिता नहीं है। ओलंपिक में एलिस के रसोईया कोरोबस ने भी हिस्सा लिया था। वह 210 गज नग्न दौड़ जीतकर प्राचीन ओलंपिक का प्रथम चैंपियन बना था। उसे इतिहास में सबसे पहला ओलंपिक चैंपियन माना जाता है।

23 जून, 1894 को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना के बाद नए रूप में 1896 से आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन शुरू हुआ। 1890 में फ्रांस के युवा शिक्षा शास्त्री पियरे द कुबर्तिन ने ‘यूनियन डेस सोसायटीज फ्रांसीसीज द स्पोर्ट्स एथलेटिक्स’ नामक एक खेल संगठन की नींव रखी। उसके दो वर्ष बाद कुबर्तिन के दिमाग में ओलंपिक खेलों को पुनर्जीवन देने का विचार आया। खेल संगठन की 25 नवम्बर, 1892 को पेरिस में हुई एक मीटिंग में उन्होंने अपने विचार भी रखे किंतु उनके उस भाषण से कुछ हासिल नहीं हुआ। उसके दो वर्ष बाद कुबर्तिन ने नौ देशों के 79 डेलीगेट्स की मीटिंग आयोजित की। इस मीटिंग में कुबर्तिन ने पूरे उत्साह से ओलंपिक खेलों की नए सिरे से पुनः शुरुआत करने संबंधी भाषण दिया। इस बार वह लोगों को अपने विचारों से प्रभावित करने में सफल हुए। तय किया गया कि कुबर्तिन इन खेलों के आयोजन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समिति का गठन करें। उसके बाद ‘अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति’ का गठन हुआ। इसके प्रथम अध्यक्ष के रूप में ग्रीस के डेमट्रियोस विकेलास का चयन हुआ। प्रथम ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए एथेंस को चुना गया और इसकी तैयारियां शुरू हुई। 05 अप्रैल, 1896 को प्रथम आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई। प्रथम आधुनिक ओलंपिक खेलों का उद्घाटन 5 अप्रैल, 1896 को एथेंस (यूनान) में किंग जॉर्ज पंचम ने किया।अमेरिका के जेम्स बी. कोनोली को पहले आधुनिक ओलंपिक खेल में प्रथम ओलंपिक चैम्पियन बनने का गौरव हासिल है।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाने की शुरुआत 23 जून, 1948 को हुई थी। वर्तमान में दुनियाभर में 205 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियां इसकी सदस्य हैं। पहला ग्रीष्मकालीन ओलंपिक वर्ष 1896 में यूनान के एथेंस में तथा पहला शीतकालीन ओलंपिक 1924 में फ्रांस के चेमोनिक्स में आयोजित किया गया था। ओलंपिक दुनिया की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता है। इसमें 200 से ज्यादा देश हिस्सा लेते हैं। पहले ओलंपिक प्रतियोगिताओं में महिलाओं के भाग लेने पर प्रतिबंध था। 1900 में दूसरे ओलंपिक में महिलाओं को भी अपनी प्रतिभा का परिचय देने का अवसर मिला। प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1916, 1940 तथा 1944 के ओलंपिक आयोजन रद्द करने पड़े थे। यूनान (ग्रीस), ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रेलिया तथा फ्रांस ही पांच ऐसे देश हैं, जिन्होंने अब तक हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया है। ओलंपिक खेलों के उद्घाटन के समय स्टेडियम में सबसे पहले ग्रीस की टीम प्रवेश करती है। उसके बाद मेजबान देश की भाषानुसार वर्णमाला के क्रम से एक-एक करके दूसरे देशों की टीमें स्टेडियम में प्रवेश करती हैं। मेजबान देश की टीम सबके बाद स्टेडियम में पहुंचती है।

आधुनिक ओलंपिक खेलों में भारत 102 वर्ष का सफर पूरा कर चुका है। भारत ने पहली बार वर्ष 1900 में ओलंपिक में हिस्सा लिया था। तब भारत की ओर से केवल एक एथलीट नॉर्मन प्रिचर्ड को भेजा गया था। उन्होंने एथलेटिक्स में दो सिल्वर मेडल जीते थे। हालांकि भारत ने अधिकारिक तौर पर पहली बार 1920 में ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया। इस लिहाज से भारत इस वर्ष अपने ओलंपिक अभियान के 102 साल पूरे कर रहा है। अब तक ओलंपिक खेलों में भारत ने कुल 35 पदक जीते हैं। इनमें 10 स्वर्ण, 9 रजत और 16 कांस्य पदक शामिल हैं। सर्वाधिक पदक भारतीय हॉकी टीम ने जीते हैं।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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