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गजब : मिनरल वाटर को मात देता सोनखरी के कुएं का पानी

इस कुंए की पानी टीडीएस 200 से 250 है और उनके जानकारी में अब तक एक भी सदस्य कैंसर या अन्य जानलेवा बीमारी से ग्रसित नहीं हुआ है, कुएं की पानी की तासीर ऐसी है कि वे इसी पानी से ग्रामीण ना केवल प्यास बुझाते है बल्कि उनकी लाइफ लाइन भी बनी हुई है, सड़क के किनारे होने से इस चिलचिलाती धूप में राहगीर भी अपना गला तर किए आगे नहीं बढ़ते

-सुरेश गांधी

वाराणसी : शहर हो देहात बोतल बंद पानी या यूं कहे आरओ का पानी अब हम सभी की जरूरत बन गई है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए जहां तक संभव है, हर कोई घर से बाहर बोतल बंद पानी ही खरीदकर पीते हैं। लेकिन सुखद है इस बोतलबंद पानी के दौर में भदोही के सोनखरी में कुंए का पानी ही मिनीरल वॉटर बन गया है, वो भी तब जब लोगबाग कुंए का पानी पीना तो दूर नहाना-धोना भी पसंद नहीं करते। ग्रामीणों की माने तो इस कुंए कीपानी टीडीएस 200 से 250 है और उनके जानकारी में अब तक एक भी सदस्य कैंसर या अन्य जानलेवा बीमारी से ग्रसित नहीं हुआ है। उनके सेहत के लिए यह पानी रामबाण से कम नहीं है। बता दें, आधुनिकता के इस दौर में कुंए के नाम से ही लोगों के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगती है। यह अलग बात है कि कुछ गावों में दो जून कि रोटी नहीं जुटा सकने में नाकाम लोगों की हलक कुंए के पानी से ही तर होती है। कुछ ऐसा ही पांच सौ आबादी वाले सोनखरी गांव के लोगों के लिए कुंए का पानी ही बन गया है मिनरल वाटर। ऐसा नहीं है कि इस गांव में हैंडपंप नहीं या पानी के अन्य स्रोत नहीं है, लेकिन उनके कुएं की पानी की तासीर ऐसी है कि वे इसी पानी से ना केवल प्यास बुझाते है बल्कि उनकी लाइफ लाइन भी बनी हुई है। खास बात यह है कि सिर्फ गांव के ही लोग नहीं सड़क के किनारे होने से इस चिलचिलाती धूप में राहगीर भी अपना गला तर किए आगे नहीं बढ़ते।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक प्रति लीटर पानी में टीडीएच की मात्रा 300 मिग्रा से कम होनी चाहिए। अगर एक लीटर पानी में 300 मिग्रा से 600 मिलीग्राम तक टीडीएस हो तो उसे पीने योग्य माना जाता है। हालांकि अगर एक लीटर पानी में टीडीएस की मात्रा 900 मिग्रा से ज्यादा है तो वो पानी पीने योग्य नहीं माना जाता है। पानी में ज्टीडीएस 100 मिग्रा से कम हो तो उसमें चीजें तेजी से घुल सकती हैं। प्लास्टिक की बोतल में बंद पानी में कम टीडीएस हो तो उसमें प्लास्टिक के कण घुलने का खतरा भी रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। क्योंकि पानी में मिनरल कम होने से हड्डियां कमजोर पड़ने लगती है और-और तरह-तरह के बीमारी घर कर जाते है। सोनखरी के कुए का पानी पीने के बाद भले चंगे लोगों को कोई तकलीफ नहीं होती है, न ही उनको किसी भी तरह का कोई नुकसान होता है। उल्टे लोगों का दावा है कि उनका स्वास्थ्य कुएं का पानी पीने से बिल्कुल ही ठीक रहता है। दिलीप यादव ृका कहना है कि कुए के पानी की तारीफ जितनी भी की जाए कम होगी। पर्यावरणविद् घनश्याम का कहना है कि इस कुएं के साफ पानी के बारे में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि बिना तकनीकी परीक्षण के ही पानी को मिनरल वाटर की माफिक माना जाता है। जलीय जीव की बायोलॉजिकल डिमांड 1.6 मिग्रा प्रति लीटर से कम न हो और 62 मिग्रा प्रति लीटर से ज्यादा न हो। जबकि कुए के पानी की बीओडी 2.3 मिग्रा प्रति लीटर है। केमिकल ऑक्सीजन डिमांड 6.00 मिग्रा प्रति लीटर से कम न हो, 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा न हो। जबकि इसका पानी की 14.00 है।

इस तरह के पानी सेहत के लिए है फायदेमंद

इंसानी शरीर का लगभग 70 प्रतिशत पानी से बना हुआ है. इसमें से काफी कुछ पसीने और यूरिन के रूप में निकल जाता है. यही वजह है कि शरीर का हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी माना जाता है. शरीर में पानी पर्याप्त मात्रा में रहने पर सेहत सही रहती है. टैप वॉटर एल्युमिनियम और पेस्टीसाइड्स से भरा होता है इसलिए इसे उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए. टैप वॉटर वो पानी है जो पाइपों के जरिए नलों से आता है. ये पीने लायक हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता. पानी मिनरल्स से भरपूर होता है यानी इसमें सल्फर, मैग्नीशियम और कैल्शियम पाया जाता है. जो सभी चीजें स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं. अलग-अलग ब्रांड के मिनरल वॉटर में खनिज की मात्रा भी अलग-अलग होती है. इसी मात्रा के अनुसार पानी का स्वाद हल्का खारापन लिए होता है. मिनरल्स युक्त पानी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है लेकिन ये पानी हर कोई अफोर्ड नहीं कर सकता. स्प्रिंग वॉटर एक ऐसा पानी है जो बोतलबंद होता है और क्लेम करता है कि ये ग्लेशियर वॉटर है. प्राकृतिक स्प्रिंग वॉटर सीधे ग्राउंड से गुजरकर आता है और अशुद्धियों से भरा होता है, जब तक कि इसे ट्रीट न किया जाए. हालांकि वॉटर ट्रीटमेंट के बाद ये पानी सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.

स्पार्कलिंग वॉटर सोडा पानी या कार्बोनेटेड वॉटर के नाम से जाना जाता है. ये कार्बोनेशन की प्रक्रिया से गुजरता है और इसी वजह से सोडा वॉटर की तरह दिखता है. हालांकि, स्पार्कलिंग वॉटर में मिनरल्स होते हैं लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए किसी भी तरह से सेहतमंद नहीं होता और महंगा भी होता है. प्योरिफाइड वॉटर अपने स्त्रोत से आने के बाद प्लांट में शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरता है. इससे पानी में मौजूद बैक्टीरिया, अशुद्धियां खत्म हो जाती हैं. इसे बाजार से भी लिया जा सकता है या फिर अपने घर पर ही वॉटर प्यूरिफायर लगाकर ये पानी पी सकते हैं.वेल वॉटर सबसे गंदा पानी माना जाता है. ये न तो साफ होता है और न ही सेहत के लिए फायदेमंद. बारिश के दौरान पानी मिट्टी से होते हुए भूमिगत हो जाता है. ग्रामीण इलाकों में कुआं खुदवाकर यही पानी पीने के काम आता है. ये ग्राउंडवॉटर होने की वजह से तमाम अशुद्धियों से भरा होता है. इसे पीने से पहले प्यूरिफिकेशन की प्रक्रिया से जरूर गुजारा जाना चाहिए. डिस्टिल्ड वॉटर रिवर्स ऑस्मॉसिस और डिस्टिलेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है ताकि इसकी अशुद्धियां खत्म हो जाएं. हालांकि इस कोशिश में पानी में मौजूद नेचुरल खनिज भी नष्ट हो जाते हैं. इसे पीने से शरीर में खनिज की कमी हो जाती है. पानी साफ करने का कोई दूसरा विकल्प न होने पर घर पर उबालकर पिया जा रहा पानी इसी श्रेणी में आता है. पानी की इन श्रेणियों के अलावा कई दूसरे प्रकार भी हैं. इनमें फ्लेवर या इंफ्यूज किया पानी और एल्केलाइन वॉटर मुख्य हैं. फ्लेवर वाले पानी में मिठास मिलाई जाती है जो कि सेहत के लिए खराब है. दूसरे प्रकार में पीएच लेवल ज्यादा होता है, जो कि एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करता है और कई बीमारियों से बचाव भी करता है.

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