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लेख

सरकार को घेरने का कमजोर तरीका है हंगामा

-ललित गर्ग संसद का मानसून सत्र भारी हंगामे की भेंट चढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, कोई ठोस कामकाज अथवा राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक चर्चा न होना विपक्ष की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। यह भारतीय लोकतंत्र की बड़ी कमजोरी बनती जा रही है कि सरकार को जरूरी …

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मध्य प्रदेश को भाई मेडिकल की हिंदी में पढ़ाई

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजादी के 75 वें साल में मैकाले की गुलामगीरी वाली शिक्षा पद्धति बदलने की शुरुआत अब मध्य प्रदेश से हो रही है। इसका श्रेय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान और चिकित्सा शिक्षामंत्री विश्वास सारंग को है। मैंने पिछले साठ साल में म.प्र. के हर मुख्यमंत्री से …

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नई उड़ान पर योगी का यूपी

-शशिकांत जायसवाल योगी 2.0 में उत्तर प्रदेश ने नए संकल्पों के साथ देश में नंबर एक अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के साथ नई उड़ान भरनी शुरू कर दी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती सौ दिन काफी अहम रहे। इस अवधि में सरकार ने बड़ी …

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झुंझुनू के लाल, बहादुरी में बेमिसाल

(कारगिल विजय दिवस/26 जुलाई पर विशेष) -रमेश सर्राफ धमोरा देश रक्षा के लिये सेना में शहादत देना राजस्थान की परम्परा रही है। झुंझुनू जिले के गांवों में लोक देवताओं की तरह पूजे जाने वाले शहीदों के स्मारक इस परम्परा के प्रतीक हैं। इस जिले के वीरों ने बहादुरी का जो …

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आजाद भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू देश की पहली राष्ट्रपति हैं, जो 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद जन्मी हैं। हालांकि नरेन्द्र मोदी भी आजादी के बाद जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री है। देखा जाए तो अब तक भारत में जितने भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बने हैं, वो सब देश को आजादी …

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18 जुलाई को ही अंग्रेजों ने रखी थी ‘टू नेशन थ्योरी’ की नींव

गांधी-नेहरू ने दी थी माउंटबेटन की बंटवारे की योजना को मंजूरी अबुल कलाम आजाद और पुरुषोत्तम दास टंडन ने किया था विरोध -संजय सक्सेना, लखनऊ 18 जुलाई का दिन वैसे तो अन्य दिनों के जैसा ही सामान्य है, लेकिन भारत के इतिहास में आज का दिन काफी महत्व रखता है, …

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एक अभागा प्रधानमंत्री!

-के. विक्रम राव आज उस कांग्रेसी प्रधानमंत्री की 101वीं जयंती है जिसका सोनिया गांधी विरोध करती रहीं। जिससे वह नफरत करती थीं। हालांकि मुम्बय्या फिल्मी डायलाग है कि ”प्यार ही नफरत का दूसरा रूप है।” मगर सोनिया गांधी सच में पीवी नरसिम्हा राव से घोर घृणा करतीं रहीं। फिर भी …

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का भारत

(स्मृति शेष-23 जून 1953)  -शिव प्रकाश जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में लाने और एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान (झंडा) के विरोध में पहली आवाज उठाने वाले भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 23 जून को बलिदान दिवस है। उनका यह …

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आखिरकार कोशिश लाई रंग, संयुक्त राष्ट्र में खत्म हुई ‘हिंदी’ की जंग

-प्रमोद भार्गव आखिरकार दीर्घकालिक प्रयासों के बाद भारत की राजभाषा हिंदी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बन ही गई। भारत के हिंदी के प्रस्ताव को महासभा ने मंजूरी दे दी। इसके साथ बांग्ला और उर्दू को भी इस श्रेणी में लिया गया है। अब संयुक्त राष्ट्र में सभी कामकाज और …

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worrying : ग्लोबल इकोनॉमी पर भारी पड़ता रूस-यूक्रेन युद्ध

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार ग्लोबल इकोनॉमी पर रूस-यूक्रेन युद्ध का असर तेजी से दिखाई देने लगा है। एक ओर दुनिया के अनेक देशों के सामने खाद्यान्न का संकट मुंह बाएं खड़ा है तो दूसरी और आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। कोविड त्रासदी …

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