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ज्ञानवापी मामले में शपथपत्र के साथ मिली वीडियो और फोटोग्राफ

मामलों की सुनवाई फिलहाल गर्मी की छुट्टी के बाद तक के लिए टली, जिला जज की अदालत में 4 जुलाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट में 8 जुलाई को बची सुनवाई फिर होगी, मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष के दावों पर सिरे से जताई आपत्ति

-सुरेश गांधी

वाराणसी : ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में सोमवार को जिला कोर्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हुई। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में मामले की पोषणीयता (मामला सुनने योग्य है या नहीं) पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने लगातार दो घंटे तक अपनी दलीलें पेश कीं। मुस्लिम पक्ष ने हिंदुओं के दावे पर आपत्तियां दर्ज कराईं. कोर्ट ने सुनवाई को 4 जुलाई तक टाल दिया है। उधर, ज्ञानवापी को हिंदुओं को सौंपने की मांग वाली याचिका पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने मूल वाद की कॉपी सारे वादियों को देने के लिए कहा है. कोर्ट ने अगली सुनवाई 8 जुलाई को रखी है। उम्मीद है अगली तारीख पर हिंदू पक्ष अपनी दलीलें रख सकता है। इसके अलावा सायंकाल दोनों पक्षों की सहमति पर मस्जिद के सर्वे की वीडियो फुटेज और फोटोग्राफ भी सौंप दिया गया है। अदालत ने सर्वे रिपोर्ट और वीडियो-फोटो देने से पहले शपथ पत्र भी जमा कराया। इसके बाद रिपोर्ट की सीडी दी गई। शपथपत्र में इस बात का जिक्र है कि वीडियो और फोटो को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

दोपहर तय समय पर ढाई बजे के करीब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो दोनों पक्षों के वकीलों ने जिला जज की अदालत का रुख किया। सबसे पहले मुस्लिम पक्ष अदालत को मामले की सुनवाई के अधिकार को लेकर जिरह की। लगातार दो घंटे तक अदालत ने दलील सुनने के बाद समय कम होने के कारण मामले को टाल दिया है। अब चार जुलाई को अदालत इसे सुनेगी। उस दिन भी मुस्लिम पक्ष अपनी दलील जारी रखेगा। हिन्दू पक्ष के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट हरिशंकर जैन एवं उनके पुत्र एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के साथ ही वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी, एडवोकेट सुभाषनंदन चतुर्वेदी व एडवोकेट सुधीर ने बताया कि सुनवाई में प्रतिवादी पक्ष ने वादी पक्ष की ओर से दाखिल मुकदमे के बिंदुओं पर अपनी बात कही। 52 पैरा के वाद में 39 पैरा तक प्रतिवादी पक्ष ने अपनी बात कही।

अदालत में उनकी ओर से दो बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया। इसमें 1937 में सरकार बनाम दीन मोहम्मद मुकदमे की चर्चा हुई। इसके अलावा वादी पक्ष की ओर से कहा गया कि यह मुकदमा पांच महिलाओं ने किया है जबकि इसका प्रारूप लोक वाद जैसा है। इसलिए यह मुकदमा सुनने योग्य नहीं है। इसके साथ ही वैदिक सनातन संघ की अंतरराष्ट्रीय किरण सिंह की ओर से दाखिल मुकदमा में सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक 8 जुलाई की तिथि सुनवाई के लिए तय की है। इस मुकदमे में प्रतिवादी पक्ष ने मुकदमे की नकल की मांग की है। कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष के दावे पर आपत्तियां दर्ज कराईं। मां शृंगार गौरी से संबंधित मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है, इस दावे के साथ मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने अपनी दलीलें पेश कीं। मुस्लिम पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर कथित तौर पर पाए गए शिवलिंग और उनकी पूजा करने के दावे पर आपत्ति जताई। मुस्लिम पक्ष ने 1937 के दीन मोहम्मद बनाम राज्य सचिव के मुकदमे का फैसला पढ़ा। कहा कि अदालत ने मौखिक गवाही और दस्तावेजों के आधार पर फैसला किया था कि यह पूरा परिसर (ज्ञानवापी मस्जिद परिसर) मुस्लिम वक्फ का है और मुसलमानों को इसमें नमाज अदा करने का अधिकार है। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि मां शृंगार गौरी का मुकदमा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट-1991 का उल्लंघन है।

ज्ञानवापी मामले में निर्मोही अखाडा सहित दो और याचिकाएं दायर
श्रृंगार गौरी ज्ञानवापी मामले में पक्षकार बनने के लिए सोमवार को अदालत में आवेदनों की झड़ी लग गई। हिंदू सेना, ब्राह्मण सभा, निर्मोही अखाड़ा, मूल देवता काशी विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र विजयशंकर रस्तोगी समेत कई अन्य लोगों ने पक्षकार बनाने के लिए जिला जज की अदालत में आवेदन दिया। इससे पहले भी पक्षकार बनने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी समेत कई अन्य लोगों ने आवदेन दिया है। निर्मोही अखाड़े ने ज्ञानवापी में नित्य दर्शन-पूजन और हिंदुओं के अधिकार को लेकर याचिका दी है। आवेदन में कहा गया है कि आदेश 7 नियम 11 में पोषणीयता के जिस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है, उसमें प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान को पक्षकार नहीं बनाया गया है। जो मुख्य देवता हैं और आवश्यक पक्षकार है। ऐसे में उनका पक्ष सुना जाना आवश्यक है। बता दें कि अदालत में पक्षकार बनने के लिए महंत कुलपति तिवारी समेत कई अन्य लोगों ने आवदेन दिया है।

मस्जिद कमेटी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग
विश्व वैदिक हिंदू सनातन संघ प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। इसमें उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली संस्था अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की अपील की है। उन्होंने इंतजामिया कमेटी पर वर्शिप एक्ट का उल्लंघन वा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। इससे पहले उन्होंने चौक थाने में प्रार्थना पत्र भेजा था। चौक थाने में मुकदमा न होने के बाद उन्होंने आज कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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