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लाल किले से PM मोदी ने दिलाए ये 5 प्रण

नई दिल्ली: आज पूरा देश स्वतंत्रता के जश्न में डूबा है। इस बार का स्वतंत्रता दिवस इसलिए और विशेष है क्योंकि हम स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने नौवीं बार लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस के चलते 21 तोपों की सलामी भी दी गई। यह 9वां अवसर है, जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में झंडारोहण किया। लाल किले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की पुख्ता व्यवस्था की गई हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा, और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत तथा उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए। दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के अंदर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी स्थिति में बचने नहीं देना। तीसरी प्रण शक्ति है कि हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए। यही विरासत है, जिसने भारत को स्वर्णिम काल दिया था। यह विरासत है जो वक़्त वक़्त पर परिवर्तन करने का सामर्थ्य रखती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, चौथा प्रण है एकता और एकजुटता। 130 करोड़ देशवासियों में एकजुटता। न कोई अपना न कोई पराया। एक भारत औऱ श्रेष्ठ भारत के लिए यह प्रण है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 5वां प्रण है नागरिकों का कर्तव्य। इससे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री भी बाहर नहीं होता है। ये 25 वर्षों के संकल्प को पूरा करने के लिए हमारे प्रण हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के लिए अभी से संकल्प लें, कि तब यह विकसित देश होगा। विकास के केंद्र में मनुष्य होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा, तब युवा 50-55 साल का होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज जब हम स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो बीते 75 वर्षों में देश के लिए जीने-मरने वाले, देश की सुरक्षा करने वाले, देश के संकल्पों को पूरा करने वाले चाहे सेना के जवान हों, पुलिसकर्मी हों, जन प्रतिनिधि हों, स्थानीय स्वराज की संस्थाओं के प्रशासक रहे हों। पीएम ने कहा, हिंदुस्तान के हर कोने में उन सभी महापुरुषों को याद करने की कोशिश की गई, जिनको किसी न किसी कारणवश इतिहास में जगह न मिली, या उनकों भुला दिया गया था।

आज देश ने खोज खोज कर ऐसे वीरों, महापुरुषों, बलिदानियों, सत्याग्रहियों को याद किया, नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा, विश्व भारत की तरफ गर्व, अपेक्षा से देख रहा है। दुनिया समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर खोजने लगी है। यह हमारे 75 वर्ष की अनुभव यात्रा का परिणाम में है। जिस प्रकार से संकल्प लेकर हम चल रहे हैं, दुनिया हमारी तरफ देख रही है। मैं इसे इतनी शक्ति के तौर पर देखता हूं। मैं थ्री शक्ति के तौर पर देखता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे भारत ने सिद्ध कर दिया कि हमारे पास ये अनमोल सामर्थ्य है। 75 वर्षों की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हर एक की कोशिश से हम यहां तक पहुंच पाए। स्वतंत्रता के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला।