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ज्ञानवापी मामला : 12 जुलाई को साफ हो जायेगा मामला सुनने योग्य है या नहीं

मुस्लिम पक्ष की दलीलें पूरी, अब हिन्दू पक्ष की सुनवाई के बाद होगा निर्णय, अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत वाद सुनवाई योग्य है या नहीं पर बहस जारी है, दस दिनों में आ सकता है बड़ फैसला

-सुरेश गांधी

वाराणसी : गर्मी की छुट्टियों के बाद ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में सोमवार को जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई हुई. मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने 52 बिंदुओं में से 51 पर अपनी दलीलें रखीं. अब इस मामले में कोर्ट 12 जुलाई को सुनवाई करेगा. मुस्लिम पक्ष भी बाकी बचे बिंदुओं पर उसी दिन अपनी दलीलें रखेगा. हिन्दू पक्ष के वकील के मुताबिक बुधवार को मुस्लिम पक्ष की तरफ से बहस पूरी हो जाएगी. मामले की सुनवाई राखी सिंह समेत पांच महिलाओं की तरफ से दाखिल वाद पर की जा रही है। अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत वाद सुनवाई योग्य है या नहीं पर बहस हो रही है। उम्मींद है अगली तारीख पर वाद के खारिज होने योग्य है या नहीं पर फैसला हो जायेगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में सिर्फ 40 लोगों को जाने की अनुमति दी गई. इसके अलावा संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट रूम के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी थी।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने बताया कि अगली सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष कानूनी बिंदुओं के आधार पर अपनी दलीलें रखेगा। आज सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष की ओर पेश किए गए 52 में से 51 बिंदुओं पर कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। अब 12 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच जिरह के बाद कोर्ट फैसला सुना सकता है। माना जा रहा है कि ज्ञानवापी केस में रोज सुनवाई होती रही तो अलगे दस दिनों में फैसला आ सकता है। ज्ञानवापी परिसर में हुए सर्वे की रिपोर्ट पर वाराणसी कोर्ट में सुनवाई खत्म होने के बाद 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी। लिहाजा ज्ञानवापी मामले में आज से शुरू हुई सुनवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है। बता दें, दिल्ली की राखी सिंह व वाराणसी की लक्ष्मी देवी, सीता शहू, मंजू व्यास व रेखा पाठक की ओर से दायर याचिका पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वहां वजूखाने में दावे वाले शिवलिंग को सील करने का आदेश दिया था। अंजुमन इंतजामिया ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस पूरे मामले की पोषणीयता पर सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत से जिला जज की अदालत में मामला ट्रांसफर कर दिया गया था। जिला जज की अदालत में 26 मई से 30 मई तक सुनवाई चली थी। ग्रीष्मावकाश के चलते सुनवाई चार जुलाई तक टल गई थी। इससे पहले मसाजिद कमेटी के अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि विशेष धर्म उपासना स्थल विधेयक 1991 यहां लागू होगा, जिसमें आजादी के समय धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, वही रहेगी। जबकि हिंदू पक्ष की दलील है कि यहां विशेष धार्मिक उपासना स्थल काननू लागू नहीं होगा, क्योंकि यहां आजादी के बाद भी श्रृंगार गौरी की पूजा होती थी। बता दें कि दिल्ली निवासी राखी सिंह व अन्य चार महिलाओं ने 18 अगस्त 2021 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में याचिका दायर किया था। इस केस में याची की ओर से मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन व और ज्ञानवापी परिसर स्थित अन्य देव विग्रहों के संरक्षण की मांग की गई है। इस पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे भी हो चुका है। इतना ही नहीं सिविल जज के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाना और शौचालय को सील किया जा चुका है।

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