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माँ के कदमों में स्वर्ग पर पिता स्वर्ग का दरवाजा…!

अंतरराष्ट्रीय फादर्स डे (19 जून) पर विशेष

माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे? मतलब साफ है जीवन भले ही विधाता देता है लेकिन जीवन कैसे जीया जाता है, यह पिता सिखाता है। मेरे पिता ने हमेशा कहा, किस्मत वह है जहां संभावना की मुलाकात तैयारी से होती है। इसलिए हमेशा तैयार रहो। रॉकस्टार बनने की जगह हमेशा सुपरपर्सन बनने की सोचो, सुपर स्टार खुद-ब-खुद तुम्हें फॉलो करेंगे। पहला फादर्स डे 19 जून 1910 को मनाया गया था। इस बार फादर्स डे 19 जून 2022 को है। इस दिन बच्चे अपने पिता को अहसास दिलाते हैं कि वो उनके लिए कितने खास हैं. फादर्स डे का दिन पिता के बलिदान, मेहनत, प्यार और त्याग की भावना के प्रति कृतज्ञ होने का दिन है।

-सुरेश गांधी

फादर्स डे यानी परिवार की सबसे मजबूत कड़ी पापा को समर्पित दिन। वक्त के साथ पिता के मिजाज और अंदाज बदलते गए, लेकिन बच्चों का पापा के प्रति समर्पण कभी कम न हुआ। यूं पापा भी बदलते वक्त के साथ बच्चों के दोस्त बनते गए। पिता अब बच्चों के दोस्त है, लेकिन इनके पिता कभी सख्त हुआ करते थे। और यही वजह है कि आज के पापा और बच्चों के बीच दोस्ती की सुपर-डुपर कमेस्ट्री काम करती है। मतलब साफ है पिता – यह केवल संबोधन नहीं बल्कि एक हिम्मत व विश्वास है। जिसके कंधों पर हर परिवार की नींव टिकी होती है। मां के त्याग व बलिदान की बात हम सब करते हैं। मगर अफसोस- पिता के प्यार, देखभाल व अपनेपन की बात भूल जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि हर मां में भी पिता का अंश है। पिता वह उम्मीद है, जो सिर्फ बाहर से सख्त है, लेकिन उसके भीतर अपनी संतान के लिए अहसासों से भरा हुआ कोमल हृदय है। या यूं कहे पिता बच्चों के लिए संबल होता है, आदर्श होता है। बच्चे पिता से बहुत कुछ सीखते हैं, पिता की अच्छाईयां बच्चे संस्कारों के रुप में अपनाते हैं। या यूं कहे पिता अपने बच्चों का रोल मॉडल होते हैं। कहते हैं ना पिता हैं तो सारे जहां खुशियां हमारी ही है और बाजार के सारे खिलौने अपने हैं। पिता की वजूद उस वटवृक्ष की तरह है जो हमें ताउम्र सुकून की छाया प्रदान करता है। उसके नीचे रहते हुए हमें कभी दुनियावी धूप व ताप जलाता नहीं, बल्कि वह सुरक्षा की ऐसी मजबूत दीवार होते है कि जिसके भीतर हम हमेशा से खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।

बच्चों के लिए अपना पिता इतनी ऊंची पायदान पर बैठा होता है कि पिता की कमजोरियां बच्चों को अक्सर हिला देती हैं। यही वजह है कि अच्छाईयां ही नहीं कभी-कभी बुराईयों से भी बच्चे जिन्दगी की पाठ समझ लेते हैं। क्या करना है, यह वे पिता की अच्छाई से समझते हैं, तो क्या नहीं करना है कई बार पिता की गलतियां बता देती है। वैसे हर मामले में यह जरुरी नहीं कि बच्चे पिता की गलतियों से सीख लें। कई बार बच्चे भी पिता के साथ-साथ बिगड़ जाते हैं। उनकी गलत बातों का अनुसरण करने लगते हैं। तो कई मर्तवा पिता की गलतियां बर्दाश्त न कर पाने के कारण बच्चे विद्रोही हो जाते है और बच्चों और पिता के संबंद्धों में खटास आ जाती है। यह दोनों ही पक्षों के लिए दुःखदायी स्थिति होती है, इससे परिवार डगमगा जाते है, डिसफंक्शनल हो जाते हैं। सार यही है कि पिता होना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और यह बात को अपने आचरण में बहुत सम्हालकर समाहित करना चाहिए। इंसान की पहली गुरु मां ही नहीं, पिता भी होते हैं। पिता जीवन का वह अनमोल तोहफा है, जिसके अहसास मात्र से हृदय के तार झंकृत हो जाते हैं। एक संपूर्ण व्यक्तित्व, जिसकी छांव तले हम अपने को बेहद महफूज समझते हैं। एक पिता अपने बच्चों के नन्हें लड़खड़ाते कदमों को संभालने की कोशिश करता है, खुद को तकलीफ में रखकर दुनिया जहान की खुशियां बच्चों को देने की कवायद में लगा रहता हैं। अगर आप कभी कुछ गलत करते हैं तो सही राह दिखाता है, कभी आपकों डांटकर, कभी प्यारा से आपका दोस्त बनकर। बच्चे के तोतली जुबान से निकाल पहला शब्द पिता को सारे जहान की सारी खुशियां दे जाता है। पिता को अपनी जिंदगी बच्चे में ही नजर आती है। उसके अल्फाज भले ही शख्त हो पर उसमें गहराई होती हैं।

बस प्यार ही प्यार लुटाया ..
अंगुली पकड़ कर चलना सिखाने के साथ अच्छे संस्कार देने तक में अहम भूमिका निभाने वाले पिता को भला कौन भूल सकता है। मां अगर ममत्व प्रदान करती है तो पिता छाया। मां अगर वात्सल्य लुटाती है तो पिता सर्वस्व। अपनी संतान के लिए जितनी कुर्बानी मां देती है, पिता भी उससे कम नहीं देता। पिता जीवन की बगिया के रखवाले है। पिता की क्षत्रछाया में रहकर हर बेटा खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। उन्हीं की शिक्षा व संस्कार से पुत्र कामयाबियों की उंचाई को प्राप्त करता है। कहते है कि दुनियां का हर पिता हमेशा अपने पुत्र में जिंदा रहता है। छोटी अंगुलियां पकड़ कर चलना सीखाना, कंघे पर बैठा कर घुमाना, गोद में लेकर पुचकारना, अच्छी शिक्षा व संस्कार प्रदान करना, सही गलत में अंतर बताना और फिर दुनियां की भीड़ में शामिल कराना.. बस एक पिता ही तो यह करा सकता है। मेरे सर पर हाथ रख कर बस प्यार ही प्यार लुटाया है।

पिता हिम्मत और विश्वास है
बच्चों को जीवन के ढांचे में डालने का कार्य कभी भी पूर्ण नहीं होता, बकि जीवन भर चलता है। हर पग पर उन्हें पिता के उसी प्यार, दुलार और वात्सल्य की जरुरत पड़ती रहेगी, जो बचपन में थी। बच्चों को हमेशा आपके मार्गदर्शन की जरुरत पड़ती है। फिर चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। इसलिए हमेशा अपने बच्चों में आत्मनिरीक्षण को प्रोत्साहित करनी चाहिए। अपनी चाहतों से प्यार करें परन्तु अपने बच्चों की जरूरतों को सर्वोपरी रखें। अपनी महत्वाकांक्षयों के लिए अपने बच्चों को नजरंदाज ना करें। अगर आप डेटिंग कर रहे हैं तो अपने बच्चों को प्राथमिकता दें और उन्हें किसी भी प्रकार के खतरे में ना डालें। अपनी गृहस्थी में किसी ऐसे व्यक्ति को शामिल कर जिन्हें आप अच्छे तरीके से जानते नहीं हैं। बच्चों को सुरक्षित और अपनापन महसूस करने की आवश्यकता है। यदि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका में व्यस्त होकर अच्चानक अपने बच्चों की जरूरतों से मुह मोड़ लेंगे तो वे असुरक्षित व परित्यक्त महसूस करने लगेंगे। प्यार हर किसी को चाहिए पर अपने बच्चे के भावनात्मक स्वास्थ के कीमत पर नहीं। और यह बात बड़े बच्चों पर भी लागू होती है। आपका बच्चा क्या कहना चाहता है उसे सुनें। अपने जीवन को उनके माध्यम से ना जियें अपितु उन्हें उनके जीवन के निर्णय खुद लेकर अपने अनुसार जीने दीजिये। बार बार अपने बचपन पर भी नजर दौड़ाइए।

आपके माता पिता ने जो गलती की है उन्हें दोहराइए मत। इससे वही गलती पीढ़ियों तक चलने से बच जायेगी। हर पीढ़ी के माता पिता-बच्चों को नयी सफलता व नयी गलतियों से सीखना चाहिए। एक किशोर जो व्यासक्त की कगार पर खड़ा है, उसे अपने माता पिता के नेतृत्व की जरुरत सबसे ज्यादा होती है। ये समझना कि चूंकि वे 18 या 21 के हो गए हैं, वे सब चीज खुद सुलझा सकते हैं गलत है, लेकिन बेवजह हस्तक्षेप करना भी ठीक नहीं है। उनके दोस्तों के चुनाव को छोटा करने की कोशिश ना करें। अपितु, खुद के भी मित्र बना कर रखें। अपने पुराने दुर्व्यवहार को अपने बच्चों से साझा ना करें वरना वे खुद की गलतियों की तुलना उसी गलती से करने लगेंगे यह कह कर कि, “आप ने भी तो यही किया था।“ सकारात्मक वाक्यों से उनकी प्रशंसा करें जब भी वे कुछ अच्छा करें तो, बजाय उन्हें हमेशा दंड देने के। अपने संस्कृति, दौर, जातीय समूह या परिवार के खींचे गए माता पिता बन्ने के तरीकों को कट्टरता से ना अपनाएं। कृपया अपनी सोच का दायरा यहां तक सीमित ना करें कि सिर्फ यही एक सटीक तरीका हो सकता है अपने बच्चों को बड़ा करने का। अपने बच्चों को अति लिप्त ना बनाएं। इससे वे हठी और गैर जिम्मेदार बन सकते हैं।

बचपन में छिपा है पापा का महत्व
अगर पिता के प्रेम को जानना चाहते हैं तो आप कितने भी बड़े क्यों न हो गए हों, एक बार अपने बचपन में लौट आइए और देखिए कि कैसे पिता ने आपको साइकल चलाना सिखाया था, कैसे आपके हर उस सवाल का उन्होंने बड़े ही रोचक ढंग से जवाब दिया था जिन्हें अब सुनकर आप शायद चिढ़ जाते हैं और उनकी बात का जवाब देना जरूरी नहीं समझते। कैसे वे आपके सामने झुककर घोड़ा या हाथी बन जाया करते थे और आपकी मुस्कान से उनकी पीठ का वह दर्द भी गायब हो जाता था, जो आपके वजन के कारण हुआ था, कैसे आपकी हर छोटी से छोटी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए वे अपनी जरूरतों से समझौता कर लिया करते थे, आपके होमवर्क और प्रोजेक्ट के लिए कैसे आपके साथ वे भी देर तक जागते और उसे पूरा करवाते थे, कैसे वे आपकी छोटी-सी सफलता को भी जहान की सबसे बड़ी खुशी के रूप में मनाते थे। कैसे वे आपको स्कूल छोड़ने और लेने जाया करते थे और रास्ते में आपकी हर फरमाइश पूरी हुआ करती थी। हर शाम ऑफिस से लौटते हुए कई बार, बिन मांगे ही वे आपकी पसंद की चीजें ले आया करते थे। उनके लिए केवल आपकी खुशी अनमोल थी। अब जरा वापस लौटकर आइए इस दुनिया में और सोचिए कि पिता क्या है। सिर्फ एक पिता या आपको समझने वाला सच्चा दोस्त, आपका सहायक, पालक या फिर खुदा की नेमत।

बच्चों की सुरक्षा कवच है पापा
ऋग्वेद में ‘पिता’ शब्द शिशु पालन कर्ता के रूप में माना गया है। पिता जीवन की बगिया के रखवाले हैं। उनकी छत्रछाया में ही पलकर पुत्र आसमां की बुलंदियों को छू पाते हैं। पिता डग भरना सिखाते हैं। जीवन के पथरीले रास्ते पर चलते हुए गिरने के बाद उठना और मंजिल पाने तक चलते रहने की सीख देते हैं। बुरे-भले की शिक्षा देने वाले पिता ही होते हैं। बचपन में सिखाए अनुशासन भले ही उस दौरान कड़वे लगते हो, लेकिन सफलता की सीढ़ी चढ़ने के साथ ही उसका बेहतर परिणाम देखने को मिलता है। अर्थात पिता न केवल अभिभावक की भूमिका निभाते हैं बल्कि एक दोस्त की तरह भी होते हैं, जो समय-समय पर बेटे या बेटियों को उनकी जरूरतों के मुताबिक कठिन डगर में राह दिखाने का काम करते हैं। कोई भी व्यक्ति पिता के ऋण से उऋण नहीं हो सकता। बच्चों की जिंदगी पर पापा का बहुत बड़ा कर्ज होता है। हम जिंदगी देकर भी उनका कर्ज नहीं चुका सकते। पापा ने अपनी उंगली पकड़ हमें चलना सिखाया। पहली बार जब हम बोले तो सबसे ज्यादा खुश पापा हुए। बीमार हम होते हैं परेशान पापा हो जाते हैं।

हर मोड़ पर पापा की जरूरत
जिंदगी के हर मोड़ पर हमें पापा की जरूरत है। उनके बिना एक कदम भी चलना मुश्किल है। मेरी खुशी में ही उनकी खुशी बसती है। पापा, वो अनमोल रिश्ता है, जिन्होंने औलाद की खुशी पर अपनी खुशी लुटा दी। खुद तकलीफों की आंधी झेली, मगर हम तक उसका एक झोंका तक नहीं पहुंचने दिया। हमारी जरूरत पूरी करने के लिए कभी चिलचिलाती धूप में जिस्म को झुलसाया तो शीतलहर और मूसलाधार बारिश झेली। अपनी जिंदगी को हमारी जरूरतों पर कुर्बान कर दिया। जिंदगी की जंग से जब उदास हुए तो आकर सिर पर हाथ रखकर कहा, मैं हूं ना..। पापा वो कवच हैं जो बच्चों को सुरक्षित करते हैं। हमारी हर जरूरतों को पूरा के लिए वे कई तकलीफ सहते हैं। पापा के रूप में भगवान ने हमें बहुत बड़ा तोहफा दिया है। हमारी हर छोटी, बड़ी जरूरत के लिए पापा पूरी कोशिश करते हैं। हमारी पूरी जिंदगी पर पापा का अहसान है। वो अगर नहीं होते तो हमारा वजूद नहीं होता। वो हमारे लिए पूजनीय है।

 

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